अहमदाबाद में 12 जून को हुए एयर इंडिया के विमान हादसे की जांच अभी पूरी भी नहीं हुई है, लेकिन अमेरिका की सरकारी एजेंसियां पहले ही इसे तकनीकी खामी से इनकार करने की दिशा में जुट गई हैं। इस दुर्घटना में फ्लाइट AI-171 के टेकऑफ के कुछ सेकंड बाद क्रैश हो जाने से विमान में सवार 241 यात्रियों समेत कुल 260 लोगों की मौत हो गई थी।
भारत की एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (AAIB) इस हादसे की प्रमुख जांच एजेंसी है। अमेरिका की नेशनल ट्रांसपोर्टेशन सेफ्टी बोर्ड (NTSB) और यूके की एयर एक्सीडेंट्स इन्वेस्टिगेशन ब्रांच (AAIB) भी इसमें तकनीकी सहायता दे रही हैं। लेकिन, जांच के पूरे निष्कर्ष आने से पहले ही अमेरिका की फेडरल एविएशन एडमिनिस्ट्रेशन (FAA) ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट कर दिया है कि विमान की फ्यूल कंट्रोल यूनिट और स्विच सिस्टम में कोई मैकेनिकल फेलियर नहीं था।
FAA ने क्यों खारिज किया तकनीकी खामी का दावा?
द न्यू इंडियन एक्सप्रेस में छपी रिपोर्ट के मुताबिक, FAA ने बयान जारी कर कहा है कि विमान के सभी सिस्टम—including फ्यूल कंट्रोल यूनिट और स्विच मेकेनिज्म—डिजाइन के अनुरूप काम कर रहे थे। FAA एडमिनिस्ट्रेटर ब्रायन बेडफोर्ड ने कहा, “सिस्टम ने ठीक वैसे ही प्रतिक्रिया दी जैसी कि उससे अपेक्षा की गई थी। किसी अतिरिक्त सुरक्षा बुलेटिन की जरूरत नहीं है और न ही डिजाइन में बदलाव की कोई योजना है।”
गौरतलब है कि अमेरिकी विमान निर्माता कंपनी बोइंग भी पहले से यह दावा कर रही है कि उसके 787 ड्रीमलाइनर में कोई तकनीकी खामी नहीं है।
भारत की प्रारंभिक जांच में क्या सामने आया?
AAIB की शुरुआती रिपोर्ट के मुताबिक, टेकऑफ के कुछ सेकंड बाद विमान के फ्यूल कंट्रोल स्विच ‘रन’ से ‘कटऑफ’ की स्थिति में चले गए, जिससे दोनों इंजन पावर खो बैठे। करीब 10–14 सेकंड में स्विच दोबारा ‘रन’ पर लौटे, लेकिन तब तक इंजन रिकवर नहीं कर पाए।
कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर में दर्ज बातचीत के अनुसार, एक पायलट ने पूछा, “फ्यूल को बंद क्यों किया?”, जिस पर दूसरे पायलट ने जवाब दिया कि उसने ऐसा नहीं किया। इससे यह सवाल उठता है कि क्या यह स्विच गलती से बंद हुए या फिर सिस्टम की कोई आंतरिक खराबी थी।
क्या पायलटों पर डालने की कोशिश हो रही है जिम्मेदारी?
FAA की इस पूर्व-निष्कर्षात्मक रिपोर्ट को लेकर सवाल उठ रहे हैं कि क्या अमेरिका जांच को “मानवीय चूक” की ओर मोड़ना चाहता है? विशेषज्ञ मानते हैं कि जबतक भारत की जांच एजेंसी AAIB पूरी रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं करती, तब तक इस तरह के एकतरफा बयान Boeing और इंश्योरेंस कंपनियों को कानूनी और वित्तीय सुरक्षा देने का प्रयास माने जा सकते हैं।
क्या यह लीपापोती है?
एफएए और बोइंग की यह लाइन लेना कि कोई तकनीकी गड़बड़ी नहीं थी, जांच की निष्पक्षता पर सवाल खड़े करता है। खासकर तब जब हादसे में पायलट समेत सभी चालक दल के सदस्य मारे जा चुके हैं और खुद बचाव नहीं कर सकते।
अब सबकी निगाहें AAIB की विस्तृत रिपोर्ट पर टिकी हैं, जो तय करेगी कि इस भयावह हादसे की असल वजह क्या थी—तकनीकी गड़बड़ी, स्वचालित सिस्टम की विफलता या मानवीय भूल। लेकिन उससे पहले अमेरिकी एजेंसियों का इस तरह क्लीन चिट देना, विमानन सुरक्षा और जांच की विश्वसनीयता दोनों पर सवाल खड़े करता है।









